उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने कहा कि जाति-आधारित अत्याचारों के कई अपराधी खराब जांच और अभियोजन की लापरवाही के कारण मुक्त हो जाते हैं और इसके परिणामस्वरूप एससी / एसटी अधिनियम के तहत सजा की दर कम होती है, जिससे इस गलत धारणा को बल मिलता है कि दर्ज मामले झूठे हैं और इसका दुरूपयोग हो रहा है. उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) के एक आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की.
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