मद्रास हाई कोर्ट (madras high court) ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि दूसरे धर्म में परिवर्तित होने के बाद किसी व्यक्ति की जाति नहीं बदलती, वह अपरिवर्तित रहती है. उसके आधार पर, कोई अंतर-जातीय विवाह प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता है. न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम ने मेत्तूर तालुक में सलेम कैंप के निवासी एस पॉल राज की एक रिट याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया. याचिका में चाहा गया था कि कोर्ट के आदेश से अंतर-जातीय विवाह प्रमाण पत्र जारी हो. अपनी याचिका में कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता आदि-द्रविड़ समुदाय से था. वह जैसे ही ईसाई धर्म में परिवर्तित हुआ, उसे 30 जुलाई, 1985 को समाज कल्याण विभाग के एक जीओ के अनुसार पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत करने वाला एक सामुदायिक प्रमाण पत्र जारी किया गया था.
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