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'वे नायाब औरतें' पुस्तक बेचैन करती है और समग्रता का बोध कराती है - पुरुषोत्तम अग्रवाल

मृदुला गर्ग की पुस्तक 'वे नायाब औरतें' का दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें पुरुषों के बज़रिये ही क़िस्सागोई के काफी कुछ हिस्से को अंजाम दिया है. यानी औरतों के मार्फत पुरुष भी दाखिल हैं. इसमें देश-विदेश में मिलीं वे सब औरतें हैं जो सनकी, ख़ब्ती और तेज़तर्रार तो हैं पर उसूलन अडिग और रूढ़ियों, वर्जनाओं को तोड़ती या कारामुक्त होती हुई-निडर, दुस्साहसी, बेख़ौफ़ लेखिकाएं भी शामिल हैं, परन्तु लेखन की लोकप्रियता के चलते नहीं बल्कि अपनी किसी खासियत के कारण.

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