'साहित्य अकादमी', 'शिरोमणि लेखक पुरस्कार', 'लोटस अवॉर्ड' 'सोवियत लैंड नेहरु अवॉर्ड', 'पद्मभूषण' आदि से समादृत हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार-उपन्यासकार भीष्म साहनी अपने साहित्य के माध्यम से सामाजिक विषमता और संघर्ष के बन्धनों को तोड़कर आगे बढ़ने का आह्वान करते हैं. उनके साहित्य में सर्वत्र मानवीय करुणा, मानवीय मूल्य, नैतिकता और गलत के खिलाफ अडिग रूप से उठ खड़े होने की अनुशासित पुकार देखने को मिलती है. 'चीफ की दावत', 'साग मीट', 'तमस, 'हानूश' और 'कबिरा खड़ा बजार में' जैसे अविस्मरणीय सृजन के चितेरे भीष्म साहनी ने भारत-पाकिस्तान विभाजन और उसकी त्रासदी की गाथा कहती कहानी 'अमृतसर आ गया है' भी लिखी. ये कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के परिदृश्य पर लिखी गई है. कहानी में शरणार्थियों का पाकिस्तान से अमृतसर की ओर यात्रा के दौरान के विनाश का भयावह वर्णन है. आप भी पढ़ें यथार्थवादी साहित्यिक दृष्टिकोण को दर्शाती कहानी 'अमृतसर आ गया है'...
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