'हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय' : भारतीय राजनीति के अजातशत्रु और युगदृष्टा 'अटल बिहारी वाजपेयी' की चुनिंदा कविताएं
अटल बिहारी वाजपेयी जब संसद में बोलते थे, तो पूरा सदन उन्हें एकाग्र होकर सुनता था. दो शब्दों अथवा दो वाक्यों के मध्य में लिया गया विराम भी सम्मोहक हो सकता है, यह उन्हें सुनकर ही समझा जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र में अपने ओजस्वी भाषण से उन्होंने विश्व पटल पर हिंदी का परचम लहराया. वे जब बोलते, तो लगता उनकी वाणी में भारत बोल रहा है. उनकी भाषण शैली और लेखन मंत्रमुग्ध करने वाला था. इसमें कोई संदेह नहीं कि अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं और भाषण शैली से वे लोग भी प्रभावित थे, जो उनकी विरोधी विचारधारा से ताल्लुक रखते थे. शायद यही कारण था कि उन्हें सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे और घंटों धूप में खड़े रहते थे. वे न सिर्फ कुशल और सफल राजनेता, दृढ़ निश्चयी प्रशासक और मन मोहने वाले वक्ता थे, बल्कि अच्छे कवि और सजग-विचारशील पत्रकार भी थे. आइए पढ़ते हैं भारतीय राजनीति के अजातशत्रु और युगदृष्टा 'अटल बिहारी वाजपेयी' की वे चुनिंदा कविताएं, जिन्हें पढ़ा जाना बेहद ज़रूरी है…
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