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पलत पशओ क सहदयत समझदर और ववकशलत क मरमक वरणन करत ह महदव वरम क कहन 'नल-कतत'

महादेवी वर्मा की संपूर्ण लेखन यात्रा न सिर्फ आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास बनने की साक्षी है, बल्कि उनके लेखन के कालजयी होने का जीवंत प्रतीक भी है. उनका लेखन, उनके संस्मरण, उनकी कविताएं और उनकी कहानियां हिंदी साहित्य की दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं. साहित्य जगत में उनकी अनूठी पहचान है, जिसका अंदाजा आपको उन्हें पढ़ते हुए और गहराई तक लगता है. आइए पढ़ते हैं, उनकी मार्मिक कहानी 'नीलू-कुत्ता'. ये कहानी उनके संस्मरण-संग्रह 'मेरा परिवार' से ली गई है, जो 'लोकभारती प्रकाशन' द्वारा साल 2008 में प्रकाशित हुआ. इस संग्रह में उन्होंने अपने पालतू पशुओं के संस्मरण लिखे हैं, जिन्हें सात अलग-अलग कहानियों के रूप में विभाजित किया गया है. अपने पालतू पशुओं के प्रति उनका प्रेम अथाह था. उनके सभी पालतू पशु उनकी ज़िंदगी का हिस्सा थे, जिन्हें वो अपना परिवार कहती थीं. नीलू कुत्ते के लिए उनका प्रेम कितना खूबसूरत था, वो आप इस कहानी को पढ़ने के बाद जानेंगे.

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