एक तरह से देखा जाए, तो इंतज़ार पीड़ा देने वाली अवस्था होती है. ऐसा बहुत कम होता है कि प्रेम के हिस्से आया इंतज़ार सुखद हो, बाकि तो इंतज़ार और भी कई तरह के होते हैं, जो सुखद भी हो सकते हैं और दुखद भी. कहा जाता है, मोहब्बत में इंतज़ार आशिक का मुकद्दर होता है. हमारे शायरों ने भी इंतज़ार को अपने शेरों में कुछ इसी तरह गढ़ने की कोशिश की- जो इंतज़ार करता पाया गया, वो दुखी और परेशान और जिसने इंतज़ार करवाया वह संग-दिल. प्रेम के इस तयशुदा दृश्य ने कविता-गज़लों-शायरियों और नज़्मों में भिन्न-भिन्न रूपक प्रस्तुत किए. एक दर्दनाक स्थिति को भी कवि मन किस हद तक महसूस कर सकता है और फिर उसे अपने शब्दों से गढ़ता है, उसकी खूबसूरती उर्दू शेरों में पूर्ण रूप से दिखाई पड़ती है. आइए पढ़ते हैं इंतज़ार पर लिखे गए वो चुनिंदा शेर जिन्होंने आशिकों के दिल-ए-ग़म को बढ़ाने की बजाय उन पर दवा का भी काम किया है…
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