130 से अधिक पुस्तकों के लेखक श्रीलाल शुक्ल समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिए एक उपन्यासकार के रूप में आज भी प्रतिष्ठित हैं और हमेशा रहेंगे. वे सहज थे लेकिन सतर्क, विनोदी लेकिन विद्वान भी. शुक्ल अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत और हिन्दी भाषा के विद्वान थे. उनका व्यक्तित्व अपने आप में एक मिसाल है. वे सभी का मुस्कुराकर स्वागत करते थे और अपनी बात को बिना लाग-लपेट कहना उन्हें अच्छे से आता था. उनकी इसी ख़ूबी के चलते उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए भी व्यवस्था पर करारी चोट करने वाली रचना 'राग दरबारी' जैसी किताब हिंदी साहित्य को दी. उन्होंने संघर्ष किया, लेकिन उसका कभी विलाप नहीं किया और न ही उस विलाप से कभी अपने लेखन मे शामिल होने दिया. मज़ाक मज़ाक में गहरी बात को कैसे कह जाना ये उनके लेखन की खासियत थी. उन्होंने लघु-कथाएं भी लिखीं, जिनमें 'एक चोर की कहानी' बेहद ही मार्मिक कहानी है, छोटी है, लेकिन बहुत गहरा संदेश देती है. कहानी बताती है, कि कैसे सूखी रोटी और चने की भूख एक गरीब इंसान को जेल पहुंचा देती है और बहुत बड़े-बड़े गुनाह, घोटाले और तमाशे करने के बाद भी लोग आराम से अपना जीवन जीते हैं. कहानी समाज के इस कड़वे सच पर करारा कटाक्ष है. गरीबी इंसान को किस हद तक मजबूर कर देती है, उसे श्रीलाल शुक्ल ने इस छोटी कहानी में बड़ी सहजता से समझाने की कोशिश की है.
from Latest News देश News18 हिंदी https://ift.tt/Gn8u1mo
via
from Latest News देश News18 हिंदी https://ift.tt/Gn8u1mo
via
Comments
Post a Comment