मृणाल पांडे की कहानी 'चूहों से प्यार करने वाली बिल्ली' जानवरों के माध्यम से उजागर करती है एक दिलचस्प सामाजिक सच्चाई
"राख जैसी रंगत और नुंचे हुए कानों वाला झग्गड मुहल्ले भर में बिल्लियों का पहलवान दादा करके मशहूर था. मजाल क्या कि उसके होते गली में पराई गली का कोई और बिल्ला या बिल्ली आ घुसे? तुरंत बदन को धनुष बनाए गुर्राता झग्गड उस पर टूट पड़ता और फिर जो महाभारत होता कुछ पूछो मत. आखिरकार नुंचा नुंचाया परदेसी बिल्ला या बिल्ली तीर की तरह झग्गड के इलाके से तीर की तरह भागता दिखाई देता और विजय गर्व से सीना फुलाए झग्गड दीवार पर बैठ कर अपने घाव चाटता…" प्रस्तुत है ख्यात साहित्यकार एवं पत्रकार मृणाल पांडे की एक दिलचस्प कहानी 'चूहों से प्यार करने वाली बिल्ली'...
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