कोविड-19 से पिता की मौत के बाद शहर के ही कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय शांभवी वैश्य और उसकी मां अकेली थी. पिता के निधन ने उन्हें गरीबी में धकेल दिया. उसको स्कूली बच्चों को पढ़ाने, कॉलेज जाने और घर के कामों में अपनी मां की मदद करने के लिए मजबूर होना पड़ा. आखिरकार कड़ी मेहनत रंग लाई जब शाम्भवी वैश्य को दिल्ली के एक यूरोपीय बैंक में अपने सपनों की नौकरी मिल गई.
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