मुंबई. साल था 1943 का और भारत अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था. देशभर में क्रांति की लहर चल रही थी. देश में लाखों लोगों की तरह भारत के एक मेजर जनरल शाहनवाज खान भी इस क्रांति में कूद पड़े. क्रांति तेज हुई और आजादी के विचारों ने हवा पकड़ी. एक लंबे संघर्ष के बाद भारत आजाद हो गया. मेजर शाहनवाज खान ने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली. साथ ही मेजन शाहनवाज खान ने लातीफ फातिमा नाम की लड़की को गोद ले लिया. लातीफ फातिमा की शादी मोहम्मद खान से हुई. लातीफ और मोहम्मद खान को मोहब्बत से 2 नवंबर 1965 दिल्ली में एक अंकुर फूटा और बेटे ने जन्म लिया. लातिफ और मोहम्मद खान के लिए बारी दुनिया की तरह ये एक बच्चा था. लेकिन केवल समय जानता था कि एक दिन ये लड़का दुनिया के सारे दिल अपनी मुट्ठी में करने वाला है. ये लड़का बड़ा हुआ अभिनय का रास्ता अपनाया. लेकिन उसकी जिंदगी में एक ऐसा समय आया जब उम्मीद की कोई किरण कहीं दूर तक नजर नहीं आती थी. कहानी आगे बढ़ाते हैं और साल 2019 के उस भयानक दौर में चलते हैं जब पूरी दुनिया कोविड के सामने घुटने टेक रही थी. बॉलीवुड के खिलाफ विरोध की आंधी चल रही थी और फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी रहीं थीं. इस आंधी की चपेट में वो लड़का भी आया और 4 साल तक सारी कायनात से जूझता रहा. जब बॉलीवुड डूबने की कगार पर था, तो लड़के ने फिर कमर कसी और 1 नहीं बल्कि 2 फिल्में देकर बॉलीवुड की डूबती नैया को पार करा दिया.
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