1976 में देश में एमरजेंसी के समय असग़र वजाहत ने छोटी प्रतीकात्मक कहानियां लिखनी शुरू कीं और उनकी यह कोशिश रही कि किसी भी कहानी की शैली एक-सी न हो. कहीं ये कहानियां पंचतंत्र की कहानियां जैसी हैं, कहीं आधुनिक मुहावरों में हैं और कहीं केवल संवाद में हैं... कहीं अमूर्तन हैं, तो कहीं सूफी परंपरा की कहानियों जैसी लगती हैं. इन्हीं कहानियों को लेकर वजाहत साहब का कहानी-संग्रह है 'कूड़ा समय', जिसका पहला संस्करण 'राजपाल प्रकाशन' ने इसी साल कुछ दिन पहले ही प्रकाशित किया है. इस संग्रह की कहानियां छोटी तो हैं, लेकिन अपने अर्थ और संदर्भ में बिल्कुल छोटी नहीं हैं, बल्कि हर कहानी एक गहरा मतलब समझाती है. प्रस्तुत कहानी संग्रह से 'सब की ज़मीन', 'जन्नत का मंज़र', 'लिंचिंग', 'नेता का त्याग' और 'भय का दर्शन' कहानी...
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