बिहार के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देखें तो नीतीश कुमार की सरकार के लिए ऐसा करना अब आसान हो जाएगा. इसलिए कि नीतीश ने पहले ही जाति सर्वेक्षण के आधार पर जातियों की संख्या और उनके सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन का डाटा संग्रह कर लिया है.
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